Sunday, February 5, 2012

श्वेत बिछौने और रजत के कण : मेरी आँखेँ, मेरे क्लिक्स

श्वेत बिछौने और रजत के कण : मेरी आँखेँ, मेरे क्लिक्स


  इस बार लंदन में ढंग से हिमपात बहुत देर से हुआ। वर्ष 2008 में अक्तूबर के अंत में ही हिमपात हो गया था, 2009 में दिसंबर को हुआ था। तभी मैंने ये कुछ संस्मरण-से  व वर्णन दो खंडों में इन दो लिंक्स पर लिखे थे -



 गत वर्ष 2010 में मैं यात्रा पर थी और 2011 का हिमपात होते होते 2012 में पहुँच गए हैं।

कल रात के हिमपात का पता गत सप्ताह के प्रारम्भ से था, क्योंकि हैंडसेट पर ही सप्ताह-भर की पल पल की खबर अग्रिम देखने की सुविधा स्मार्टफोन का आविष्कार  करने वाले वैज्ञानिकों ने उपलब्ध करवा दी हैं।

कल हम सब सुबह से हिमकणों की प्रतीक्षा बार बार द्वार खोल कर देखते करते रहे।  सायं हिमपात प्रारम्भ हुआ व सोने जाते तक सब कुछ ढँक चुका था। तब मैंने अपनी फेसबुक प्रोफाईल पर हर्ष से भर लिखा -


"आज शाम से जोरदार हिमपात .... अहा... हा !!! आधी रात में भी अब बाहर चकाचौंध भर गई है और मुख्य द्वार के काँच से बाहर झाँकने पर एक लोमड़ी मेरे आँगन में खड़ी मिली। :)
...इस सफ़ेद बिछौने पर सुबह उठकर टहलने जाना पक्का कर सोने जा रही हूँ।"

प्रातः उठते ही हम सब (बिटिया दामादजी व बेटे ) बाहर टहलने निकल गए।  बाहर का दृश्य देख मुझे अपने नॉर्वे के दिन याद आ गए। खैर, उन बातों को छोड़ इस प्राकृतिक सुषमा का आनंद लेते, मेरे कैमरे से कुछ दृश्य सदा के लिए संस्मरण बन गए। कुछ चित्रों में पीछी झील व नहर पूरी जम चुके स्पष्ट दीख रहे हैं।


देखें बाहर का रूप ( सभी चित्रों को एक एक कर क्लिक कर सही आकार में देखें )


सभी चित्रों का स्वत्वाधिकार सुरक्षित है। 























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