भाषा और 'एक्स्पायरी डेट' : कविता वाचक्नवी
#भाषा-प्रयोग का एक #मनोरंजक उदाहरण आज आपसे बाँटती हूँ।
भारत में हम लोगों को अभ्यास होता है कि किसी की मृत्यु के विषय में बात करते हुए हम
कई बरस पहले जब मैंने यहाँ ब्रिटेन में एक प्रसंग में किसी से अंग्रेजी में आदतवश कहा कि 'मेरी माँ एक एक्सीडेंट में कई बरस पहले एक्सपायर हो गईं थीं' तो उसके चेहरे की रंगत और हाव-भाव बहुत ही अजीब-से थे, मानो वह कुछ समझा ही नहीं। मेरे बच्चों ने तब उसे समझाया कि वस्तुतः मैं कहना चाहती हूँ कि मेरी माँ की मृत्यु कई बरस पहले एक दुर्घना में हो गई थी।
बाद में बच्चों ने मुझे समझाया कि, माँ ! एक्सपायर होने की क्रिया / प्रक्रिया वस्तुओं व पदार्थों की होती है, माँ या कोई भी व्यक्ति पासपोर्ट, ऑफिस कार्ड, कॉलेज कार्ड, दवा या अचार या खाद्य पदार्थ नहीं होता कि उसकी कोई 'एक्स्पायरी डेट' हो और वह उस तिथि के बाद 'एक्सपायर' हो जाए। व्यक्तियों के लिए मृत्यु के वाचक शब्दों जैसे Death, Died, No more इत्यादि का प्रसंगानुसार व वाक्यरचनानुसार प्रयोग किया जाता है।
यद्यपि अब मैं सचेत रहती हूँ किन्तु अपनी भारतीय आदत से अभी भी पूरी तरह पीछा नहीं छुड़ा पाई और आज ही डॉक्टर द्वारा मेरी माँ के बारे में एक प्रश्न पूछने पर 'शी एक्स्पायर्ड इन हर अर्ली ट्वेंटी प्लस' जैसा वाक्य निकल गया तो डॉक्टर को चौंक कर कहना पड़ा कि "मैं आपकी माँ के विषय में पूछ रही हूँ"। तब मुझे अपनी गलती का भान हुआ ।
आप लोग भी इसे पढ़ने के बाद शायद भविष्य में व्यक्ति की मृत्यु के साथ 'एक्सपायर' शब्द का प्रयोग करते समय अवश्य एक बार ठिठकेंगे, यह सोच कर कि व्यक्ति कोई दवा या खाद्य पदार्थ है क्या कि जो उसकी 'एक्स्पायरी' होती है।#KavitaVachaknavee
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#भाषा-प्रयोग का एक #मनोरंजक उदाहरण आज आपसे बाँटती हूँ।
भारत में हम लोगों को अभ्यास होता है कि किसी की मृत्यु के विषय में बात करते हुए हम
- - 'उसके पिताजी एक्सपायर हो गए थे'
- - 'उसकी माता जी/बहन/पत्नी/पति/मित्र आदि को एक्सपायर हुए तो कई साल हो गए'
- - वह छुट्टी गया है, उसकी माता जी एक्सपायर हो गईं
- - रोड एक्सीडेंट में एक्सपायर हुए उसके भाई भाभी ...
कई बरस पहले जब मैंने यहाँ ब्रिटेन में एक प्रसंग में किसी से अंग्रेजी में आदतवश कहा कि 'मेरी माँ एक एक्सीडेंट में कई बरस पहले एक्सपायर हो गईं थीं' तो उसके चेहरे की रंगत और हाव-भाव बहुत ही अजीब-से थे, मानो वह कुछ समझा ही नहीं। मेरे बच्चों ने तब उसे समझाया कि वस्तुतः मैं कहना चाहती हूँ कि मेरी माँ की मृत्यु कई बरस पहले एक दुर्घना में हो गई थी।
बाद में बच्चों ने मुझे समझाया कि, माँ ! एक्सपायर होने की क्रिया / प्रक्रिया वस्तुओं व पदार्थों की होती है, माँ या कोई भी व्यक्ति पासपोर्ट, ऑफिस कार्ड, कॉलेज कार्ड, दवा या अचार या खाद्य पदार्थ नहीं होता कि उसकी कोई 'एक्स्पायरी डेट' हो और वह उस तिथि के बाद 'एक्सपायर' हो जाए। व्यक्तियों के लिए मृत्यु के वाचक शब्दों जैसे Death, Died, No more इत्यादि का प्रसंगानुसार व वाक्यरचनानुसार प्रयोग किया जाता है।
यद्यपि अब मैं सचेत रहती हूँ किन्तु अपनी भारतीय आदत से अभी भी पूरी तरह पीछा नहीं छुड़ा पाई और आज ही डॉक्टर द्वारा मेरी माँ के बारे में एक प्रश्न पूछने पर 'शी एक्स्पायर्ड इन हर अर्ली ट्वेंटी प्लस' जैसा वाक्य निकल गया तो डॉक्टर को चौंक कर कहना पड़ा कि "मैं आपकी माँ के विषय में पूछ रही हूँ"। तब मुझे अपनी गलती का भान हुआ ।
आप लोग भी इसे पढ़ने के बाद शायद भविष्य में व्यक्ति की मृत्यु के साथ 'एक्सपायर' शब्द का प्रयोग करते समय अवश्य एक बार ठिठकेंगे, यह सोच कर कि व्यक्ति कोई दवा या खाद्य पदार्थ है क्या कि जो उसकी 'एक्स्पायरी' होती है।#KavitaVachaknavee
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