Tuesday, September 16, 2014

पीढ़ियाँ

पीढ़ियाँ


'नई दुनिया' (इन्दौर) के 7 सितम्बर 2014 के रविवासरीय 'तरंग' में प्रकाशित कविता, 'पीढ़ियाँ'



Friday, September 5, 2014

हिन्दी वॉयस टायपिंग व हिन्दी वॉयस सर्च/ हिन्दी-श्रुतलेखन अर्थात् जादू का पिटारा : कविता वाचक्नवी

हिन्दी वॉयस टायपिंग व हिन्दी वॉयस सर्च/ हिन्दी-श्रुतलेखन अर्थात् जादू का पिटारा  : कविता वाचक्नवी 




कल मैंने गूगल द्वारा हिन्दी में जारी श्रुतलेखन सुविधा की सूचना दी थी। यह सुविधा ने गूगल ने कई माह से उपलब्ध करवा रखी है। मैंने फ़ोन पर इसे स्थापित/सक्रिय भी किया हुआ था किन्तु प्रयोग नहीं किया था। इसी बीच मध्य अगस्त में जब गूगल ने वॉयस सर्च के लिए भी हिन्दी उच्चारण की सुविधा जारी की तो मित्रों से बातचीत करते हुए लम्बे लेख आदि लिखने के लिए पूर्व में ही जारी व अपने मोबाईल पर स्थापित की हुई इस सुविधा को सक्रिय करने का प्रसंग भी आ गया और कल उसका तुरन्त प्रयोग कर पहला ईमेल व फेसबुक आदि पर इसकी सार्वजनिक सूचना भी जारी की। 

उत्तर में कल से अब तक कई सौ लोगों ने इसके प्रयोग की विधि पूछी है। क्रमवार दोनों सुविधाओं का प्रयोग करने की विधि यों है - 


गूगल हिन्दी वॉयस सर्च 

सिस्टम पर हिन्दी वायस-सर्च 

गूगल ने ऍण्ड्रॉइड पर मध्य अगस्त में हिन्दी में वॉयस सर्च की सुविधा जारी की। वॉयस सर्च का नया अपडेट हिन्दी का विकल्प साथ ले कर आया है 


यदि आप हिन्दी को वाचिक 'सर्च' की भाषा के रूप में प्रयोग करना चाहते हैं तो ऐसा करें - 

Google Settings >> select Search and Now >> Voice >> Language >> select हिन्दी (भारत)

  • यह सुविधा सक्रिय करने के बाद आप गूगल सर्च पर जाने पर पाएँगे कि सर्च बॉक्स में एक माईक्रोफ़ोन का चिह्न बना हुआ है। 
  • उस पर कर्सर ले जाने पर 'ध्वनि द्वारा खोजें' लिखा हुआ दिखाई देगा। इसे आप क्लिक कीजिए। 
  • क्लिक करते ही लाल रंग का माईक दिखाई देगा और लिखा होगा 'अब बोलें'। 
  • आपको जो खोजना है उसे बोलिए। मैंने तो मन्त्रों का उच्चारण कर भी देखा। किसी आश्चर्य की भाँति आपके बोले जाने वाले शब्द स्वतः 'सर्च बार' में लिखे जाते हुए दिखाई देंगे व तुरन्त उन शब्दों के सर्च परिणाम आपके सामने प्रकट हो जाएँगे। सर्च परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपका उच्चारण कितना शुद्ध व स्पष्ट था, आसपास शोर व ध्वनियों का स्तर कितना था आदि। 
क्योंकि यह वाचिक सर्च है अतः माईक में जाने वाली अन्य कोई भी ध्वनि इसे प्रभावित कर सकती है। सर्च में 'हूँ' इत्यादि के लिए कभी-कभी आपको परिणाम सन्तोषप्रद नहीं भी लग सकते हैं। वस्तुतः मशीन अक्षर व ध्वनि का अन्तर नहीं समझ पाती। हिन्दी का कोई शब्द/ अक्षर यदि किसी ध्वनि से साम्यता रखता है, जैसे 'हूँ', तो सर्चपरिणाम कुछ बेमेल आ सकते हैं। 

यह सुविधा आप लैपटॉप (क्रोम ब्राऊज़र) व ऍण्ड्रॉइड फोन दोनों पर पा सकते हैं।


गूगल हिन्दी श्रुतलेखन / वॉयस टायपिंग / डिक्टेशन

मोबाईल पर आप अब बोलकर कितना भी बड़े आकार का लेख लिख सकते हैं। गूगल की इस सुविधा द्वारा आप मोबाईल से मैसेज, फेसबुक अपडेट, वाट्सएप पर चैट, ब्लॉग में लेख, वर्ड फाईल में सामग्री आदि अर्थात जहाँ-जहाँ आप मोबाईल से टाईप कर करते हैं, वहाँ-वहाँ केवल बोलकर देवनागरी में टाईप किया हुआ पा सकते हैं। 

यह सुविधा ऍण्ड्रॉइड वाले फ़ोन पर ही उपलब्ध है, अर्थात जहाँ-जहाँ गूगल लैंग्वेज़ इनपुट टूल लगाया हो। लैपटॉप अथवा सिस्टम पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं। हाँ, आप लंबे आकार का लेख आदि लिखने के बाद उसे गूगल ड्राईव पर 'सेव' कर सकते हैं और फिर जब समय व सुविधा हो उसे लैपटॉप या सिस्टम पर बैठ सम्पादित कर सकते हैं। 
  मोबाईल पर हिन्दी श्रुतलेखन 

अतः इस सुविधा का प्रयोग करने के लिए आवश्यक है कि आप अपने गूगल खाते से गूगल के 'प्ले स्टोर' पर जाकर 'गूगल हिन्दी इनपुट टूल' को अपने फोन में स्थापित (इन्स्टाल) कर लें व भाषा सेटिंग्स में जाकर इसे सक्रिय कर लें। 


अब फोन पर श्रुत लेखन करने के लिए आपको इस प्रकार करना होगा - 

  • Settings >>Language & Input >>Google Voice Typing (आप इसे सलेक्ट करें व इसके सामने बने 'स्टार' के चिह्न को क्लिक कर खोलें) तो भाषाओं की सूची दिखाई देगी।
  • इस सूची के लगभग एकदम अन्त में 'हिन्दी (भारत)' लिखा हुआ पाएँगे। इसे सलेक्ट करें और फिर सबसे नीचे लिखा हुआ Save दबा दें।
  • सेव होते ही वापिस 'गूगल वॉयस' पर आ जाएँगे। यहाँ Languages के बाद Speech output को क्लिक करें तो तीन विकल्प खुलेंगे। उसमें आपको On चुन कर उसे चिह्नित करना है। 
  • इसके पश्चात् पुनः मुख्य सूची में थोड़ा नीचे जाने पर Block offensive words लिखा दिखाई देगा, उसे भी चिह्नित रहने दें, ताकि हिन्दी के वे शब्द जिन्हें संभवतः ध्वनियाँ मान कर सर्च में रोक दिया जाता हो, वे भी प्रकट हो सकें। 
  • अब लौट कर पुनः language & Input में आइये, Google Hindi Input के पश्चात् सूची में Google voice typing का विकल्प सलेक्ट किया हुआ दीखेगा। आपका काम हो गया है। 

चाहें तो, भाषाओं की सूची से जब हिन्दी (भारत) चुन रहे थे उस समय अंग्रेजी को सलेक्ट करना हटा दें और केवल हिन्दी को ही रखें। ऐसा करने से हिन्दी श्रुतलेखन के परिणाम अधिक स्पष्ट व अच्छे/उत्तम होंगे।

जिन लोगों के पास ऍण्ड्रॉइड फोन की सुविधा न हो, उनके लिए लैपटॉप या सिस्टम पर प्रयोग करने का केवल एक ही विकल्प गूगल ने अभी दिया है। गूगल क्रोम के ब्राऊज़र में गूगल ट्रान्सलेट को खोल कर अपने बाएँ बने विभाग में भाषाओं में 'हिन्दी' को चुनें और वहीं नीचे बने स्पीकर को क्लिक करें। जब वह लाल रंग में दीखने लगे तो बोलना प्रारम्भ करें। वहाँ स्वतः टाईप होता चला जाएगा। टाईप हो चुकी सामग्री को आप जहां चाहें प्रयोग कर सकते हैं। आशा है आगामी दिनों में गूगल इसे ब्लॉगर और ईमेल इत्यादि में भी सक्रिय कर देगा और उस से भी बढ़कर सिस्टम में गूगल इनपुट टूल के साथ ही इसे जोड़ देगा ताकि आप जहाँ चाहे सीधे वहीं जाकर हिन्दी बोलकर बोल कर देवनागरी में लिखवा सकें।
 लैपटॉप पर श्रुतलेखन 


तो इस प्रकार अब आप फेसबुक, ब्लॉग, ईमेल, वाट्सएप, मैसेज आदि पर कहीं भी देवनागरी श्रुतलेखन के लिए तैयार हैं। टाईप करने के लिए कीबोर्ड खुलते ही स्पेस बार को थोड़ी अधिक देर तक दबाए रखने पर या तो स्वतः माईक का चिह्न आ जाएगा अथवा एक पॉपअप विंडो खुलेगी जिसमें आपको Google voice typing को सलेक्ट करना होगा। ऐसा करते ही एक माईक प्रकट होगा जिस के साथ अब बोलें अथवा Speak Now लिखा होगा। आप एक एक शब्द को ठहर ठहर कर शुद्ध रूप में बोलते जाइए, जैसे डिक्टेशन देते हुए बोलते हैं, वे शब्द स्वतः टाईप होते जाएँगे। 

बस इस सुविधा का प्रयोग करते समय आपको विराम चिन्ह इत्यादि स्वयं हाथो से प्रयोग करने होंगे। मैंने बोलकर चिह्न लगवाना चाहा तो पाया कि यदि मैं पूर्णविराम का उच्चारण करुँ तो गूगल 'पूर्णविराम' शब्द लिखकर टाइप कर देता है। अभी इस सुविधा मेँ कुछ ओर सुझाव सुधार भविष्य मेँ होते रहेंगे ऐसी आशा है। कल भेजी श्रुतलेखन वाली मेरी सूचना व ईमेल में इस तथ्य का उल्लेख पढ़कर मित्र श्रीश बेंजवाल ने इसका निदान करने का उपयोगी सुझाव यों दिया है - 

"अगर लम्बा डॉक्यूमेंट है तो विरामचिह्नों का एक जुगाड़ कर सकती हैं। पहले बोलते समय उन्हें शब्द रूप में ही आ जाने दें यानि जहाँ-जहाँ पू्र्णविराम हो 'पूर्णविराम' ही बोलें। दस्तावेज पूरा हो जाने पर वर्ड या किसी अन्य एडीटर में Find and Replace में "पूर्णविराम" को "।" से रिप्लेस कर दें।"


श्रुत लेखन की इस सुविधा का उपयोग करते समय ध्यान रखें कि आप शोर-शराबे में न बैठे हों व आसपास लोगों के बोलने आदि की आवाजें न आ रही हों। 
कल क्योंकि मैं दिन भर हीथ्रो एयरपोर्ट पर थी, लोगों के ईमेल लगातार आ रहे थे कि इसकी विधि बताऊँ तो मैंने बोलकर उत्तर देने का प्रयोग करने की सोची, यत्न भी किया किन्तु आसपास निरन्तर लोगों के बोलने-चालने की ध्वनियों के बीच शुद्ध परिणाम आ ही नहीं पा रहे थे। 


आशा है, आप लोग लोग इस निश्शुल्क सुविधा का उपयोग करते समय गूगल व उसकी टीम को धन्यवाद अवश्य देंगे और हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग नेट पर करने के लिए लोगों को प्रेरित व उत्साहित अवश्य करेंगे। 

हिन्दी-दिवस (14 सितम्बर) वाले माह में ये दोनों सुविधाएँ प्रयोग में लाना प्रारम्भ कर सही अर्थों में हिन्दी-दिवस मनाएँ। 




Tuesday, September 2, 2014

बच्चे : प्रधानमन्त्री की वरीयता

बच्चे और प्रधानमन्त्री :  साधारण से असाधारण तक  : कविता वाचक्नवी


आजकल प्रत्येक समझदार व्यक्ति इस बात से चिन्तित है कि समाज की भावी पीढ़ी सही मार्ग पर कैसे चले, उसका सही निर्माण कैसे हो, उसे अच्छे संस्कार कैसे मिलें, वह अधिक सामाजिक कैसे हो, वह अधिक मानवीय व अधिक योग्य कैसे हो। जो लोग स्वयं माता-पिता बन चुके हैं वे तो और भी अधिक चिन्तित रहते हैं और पैसा खर्च कर-कर कर जाने सुबह से रात तक अपने बच्चों को क्या-क्या सिखाने के लिए यहाँ से वहाँ भेजते हैं या ले जाते हैं। प्रत्येक सचेत ही नहीं, बल्कि बुरे-से-बुरे व्यक्ति भी माता-पिता बनने पर अपनी सन्तान को एक अच्छा, बेहतर व भला नागरिक बनाना चाहते हैं (यह बात दीगर है कि वे इसमें अपनी कमियों या अपनी असमर्थताओं के कारण कई बार सफल नहीं होते)। 


हमारे समय में भी, जब हम छोटे-छोटे थे तो हमारे व हमारे साथियों के माता-पिता हमें ऐसी प्रत्येक जगह ले जाते थे, दिखाते थे, समझाते थे, पढ़ाते थे, जहाँ/जिस से कुछ भी अच्छा हो रहा हो और कोई भी अच्छा संस्कार मिलता हो, या जिस से हम में योग्यता, आत्मविश्वास, सद्गुण, गौरव की भावना अथवा प्रेरणा मिलती हो /बढ़ती हो। उस समय भले हमें अच्छा लगता हो या न लगता हो, किन्तु अब बड़े होने पर उनका मूल्य पता चला है कि उन घटनाओं ने हमारे निर्माण में कितनी महती भूमिका निभाई है और आज यदि हम साधारण से थोड़ा भी कुछ विशेष हैं तो उन्हीं सब के कारण। 


फिर धीरे-धीरे जैसे-जैसे टीवी आया, बच्चों और परिवार का समाज से व सत् + संग (अच्छे लोगों की संगत) आदि सब से नाता टूट गया। रही-सही कसर कंप्यूटर ने पूरी कर दी कि बच्चे अपने माता-पिता तक की नहीं सुनते जब वे कंप्यूटर पर किसी खेल में लगे होते हों। बच्चों पर उनके माता-पिता का ही बस नहीं चलता। भारतीय भाषा समाजों की स्थिति तो और भी खराब है क्योंकि हमने नेट पर उनके लिए कोई विकल्प ही उपलब्ध नहीं करवाए। अतः ले-दे कर बच्चे नेट पर गलत-सलत चीजों में समय बर्बाद करते रहते हैं और माता-पिता अवश से इस प्रतीक्षा में रहते हैं कि काश कोई हमारे बच्चों को ऐसा मिल जाए जो उन्हें कुछ समझा सके, सिखा सके या जिस से वे कोई सही बात समझ-सीख सकें। 


ऐसे में देश के प्रधानमन्त्री बच्चों से एक सम्वाद स्थापित करना चाहते हैं, तो यह प्रत्येक माता-पिता के लिए एक अवसर है कि इस घटना से उनके बच्चे को किसी प्रेरक अनुभव की संभावना है। राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आज़ाद ने भी युवा पीढ़ी से संवाद स्थापित किया था, वे स्वयं उन्हें पढ़ाने का उदाहरण बने। मोदी आज युवा से भी आगे जाकर बालकों और किशोरों को कुछ उद्बोधन देना चाहते हैं तो यह माता-पिता के लिए एक हितकारी अवसर है, किसी भी माता-पिता को इसमें आपत्ति नहीं हो सकती। पर देश को बर्बाद करने वाले राजनीति के खिलाड़ियों की तो असली रुचि सदा से इस देश की भावी पीढ़ी का विनाश करने में रही है। इसलिए उन्हें डर लग रहा है कि देश की भावी पीढ़ी कहीं देशभक्त प्रधानमन्त्री से देशभक्ति का पाठ न पढ़ ले। अगर देशभक्ति का पाठ पढ़ लिया तो गंदी राजनीति करने वालों की दाल नहीं गलने देंगे ये बच्चे युवा होने पर। वैसे भी जिसने अपनी ही सन्तान पर कभी ध्यान नहीं दिया और मतिमन्द सन्तान बनाई, उस से देश के बच्चों का यह हित देखा नहीं जा रहा। इसलिए इसमें भी राजनीति के पाँसे फेंक रहे हैं। माता-पिता से चाहते हैं कि वे अपनी ही सन्तान के दुश्मन हो जाएँ। एक सुअवसर को खो दें। कैसे-कैसे प्रपंची लोग भरे पड़े हैं !!

सच तो यह है कि कोई भी समझदार और जिम्मेदार माता-पिता इस अवसर का लाभ लेने से अपनी सन्तान को वंचित नहीं करना चाहेगा व न ही वंचित रहना चाहिए। 

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