Monday, December 15, 2008

घर : दस भावचित्र


घर : १० भाव चित्र

घर : दस भावचित्र

( कविता वाचक्नवी )






(1)
*

ये बया के घोंसले हैं,
नीड़ हैं, घर हैं- हमारे
जगमगाते भर दिखें
सो
टोहती हैं
केंचुओं की मिट्टियाँ
हम।
**********

(2)
*

आज
मेरी बाँह में
घर गया है
किलक कर,
रह रहे
फ़ुटपाथ पर ही
एक नीली छत तले।
*********

(3)
*

चिटखती
उन
लकड़ियों की गंध की
रोटी मिले
दूर से
घर लौटने को
हुलसता है
मन बहुत।
**********

(4 )
*

सपना था
काँच का
टूट गया झन्नाकर
घर,
किरचें हैं आँखों में

नींद नहीं आती।
*************

(5 )
*

जब
विवशता
हो गए संबंध
तो फिर घर कहाँ,
साँस पर
लगने लगे प्रतिबंध
तो फिर घर कहाँ?
***************

(6 )
*

अंतर्मन की
झील किनारे
घर रोपा था,
आँखों में
अवशेष लिए
फिरतीं लहरें।
*************

(7)
*

लहर-लहर पर
डोल रहा
पर
खेल रहा है
अपना घर,
बादल!
मत गरजो बरसो
चट्टानों से
लगता है डर।
************


(8 )
*

घर
रचाया था
हथेली पर
किसी ने
उँगलियों से,
आँसुओं से धुल
मेहँदियाँ
धूप में
फीकी हुईं।
************


(9 )
*

नीड़ वह
मन-मन रमा जो
नोंच कर
छितरा दिया
तुमने स्वयं
विवश हूँ
उड़ जाऊँ बस
प्रिय!
रास्ता दूजा नहीं।
***************

(10 )
*


साँसों की
आवाजाही में
महक-सा
अपना घर
वार दिया मैंने
तुम्हारी
प्राणवाही
उड़ानों पर।


(अपनी पुस्तक "मैं चल तो दूँ ", सुमन प्रकाशन, २००५, से )






Sunday, December 14, 2008

ट्रूली अमेजिंग : आय ऍम टच्ड

ट्रूली अमेजिंग : आय ऍम टच्ड

ट्रूली अमेजिंग : आय ऍम टच्ड


१९ मिनट के इस वीडियो में एक अमेरिकन ने ताज स्टाफ और एन. एस. जी. कमांडोज़ द्वारा किए-निभाए गए कार्य की, जिसे फर्स्ट हैण्ड अकाऊंट कहते हैं अंग्रेजी में,ऐसी रोमांचकारी जानकारी दी है कि सुन कर चकित रह जाएँ।


दो प्रतिक्रियाएँ जो मेरे पास आई हैं-

)
I am touched by the actions and values of these ordinary Indians … they are indeed my heroes …।
2)

this is amazing !! we keep criticizing our police our people & even army sitting 7000 miles away - it is indeed difficult to imagine how bravely they fought and under what conditions
And did u hear this tourist say some stupid politician of ours on tv said somethin' abt where the hotel residents were hiding and there was this communication between the terrorists and karachi which gave them the position of people hiding...

3)

It make us proud of our army and commandoes and common Indian folks working in Taj. What a selfless act. Pass it on to anybody.

That Stupid Politician was Yashwant Rao Chavan (Home Minister of India).The high causalities were due to the statements and also due to media who showed these on each channel and made things easier for terrorists.















Saturday, December 13, 2008

" या निशा सर्वभूतानाम् तस्यां जागर्ति संयमी"

" या निशा सर्वभूतानाम् तस्यां जागर्ति संयमी"

तालेबंदी,गिरोहबंदी, मंदी और चतुर चतुरानन चोरों की चाँदी







चर्चा के हर मंच पर घणा विमर्श चल रहा है, यह आत्ममन्थन, विवेचना और आत्मपरीक्षण का अवसर जैसा भी हों सकता है ब्लॉग जगत के व्यक्तित्व के लिए| ऐसी स्थितियाँ इतवारी गुफ्तगू के दिन से [ जिसमें लेखकों द्वारा नेट पर अपनी सामग्री को सुरक्षित रखने के उपायों (यथा,कॊपी करने के प्रावधान को अक्षम करना आदि) के कारण मेरी व कुछ अन्य लेखकों की ऐसी तैसी व भर्त्स्ना की गई थी] ऐसे बनीं कि अगले दिन व फिर उस से अगले भी, .... आज तक क्रम चला आ रहा है|

यद्यपि किसी प्रकरण में पता नहीं हम सभी किसी निष्कर्ष पर पहुँचे कि नहीं या यों ही आरोप प्रत्यारोप और स्पष्टीकरण व अपने को सही सिद्ध करने की जद्दोजहद में लगे हैं- सबके अपने-अपने राम जानें।

आज की तारीख में की जा रही इस चर्चा को आप सिरे से नकारना चाहें तो नकार दीजिये प्रभुओ!, आप प्रभुतासम्पन्न हैं....। और वर्चस्व व सत्ता का खेल भारत में, संसार में, किसी भी ईमानदार कोशिश के साथ कुछ भी कर सकता है। देश के पहरुए जब सोते हैं तो जगाने वालों का हश्र क्या होता है, यह इस देश की जागरुक मानी जाने वाली जमात से तो नहीं छिपा, हाँ, लचर व्यवस्था और सोए हुए पहरुओं के कारण देश की क्या दशा होती है, यह हमने एक बार और, एक बार और सही, देखते देखते अभी अभी २६ नव. को फिर से देखा है। हाँ तो जनाब, इस मार के बाद हमें थोड़ा थोड़ा समझ आने लगा जान पड़ता है कि पहरुओं के सचेत होने की कितनी गंभीर आवश्यकता होती है और सुरक्षा के प्रबंधन में खामियाजे के क्या दनादन स्टेन गनों ( गणों) से निकलते-से परिणाम होते हैंपहरुओं का जागना और सुरक्षा की चाक चौबंदी की आवश्यकता अब भी समझाने की आवश्यकता नहीं है देश में किसी को। साथ ही यह भी समझ आ गया है कि हर व्यक्ति को सचेत होकर पहरुए का दायित्व निभाना होगा व सुरक्षा के इंतजाम भी पुख्ता रखने होंगे|


यह जरूरत केवल देश की सीमाओं और पाकिस्तानी कारस्तानी तक ही सीमित नहीं है| आक्रान्ता हर जगह, हर भेस में हर चीज हथियाने की घात लगाए बैठे हैं,... और हम हैं कि अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित या सचेत बेचारे आम आदमी की सौ असुरक्षाओं की दुहाई को भी जैसे नज़रअंदाज़ करते व गलत प्रमाणित करते पाए जाते तथा इस भावना का मखौल उड़ाते हैं या उसकी इस वृत्ति को देश की सेवा में समर्पित न होने के तमगे देते हैं व भले-बुरे और ग़लत-सही के पाठ भी पढाते हैं| अब २६ नव. ने जो तमाचा हमें मारा है व सुरक्षा में खामियों का और पहरुओं के जागरूक न होने का जो प्रमाण दिया है, उसके बाद किसी और प्रमाण की जरूरत नहीं है कि क्या करणीय है व क्या अकरणीय, क्या सही क्या गलत|


आप को ऐसा ही एक और प्रमाण अपने ब्लॉग जगत में देखना हो तो आइये ताज़ा-ताज़ा गरमागरम चाय की चुस्की से जीभ आप भी जलाइये, जैसे मेरी अभी अभी जली है। यह भी आपकी स्वायत्तता, स्वतंत्रता,वर्चस्व और लोकतंत्रवादी होने का अधिकार हो सकता है कि ऊँह कर कर हाथ झाड़ चलते बनें, क्योंकि भई, जैसे देश जाए भाड़ में, तैसे ब्लागजगत और साहित्य जाए भाड़ में, कोई हमारी-आपकी ही जिम्मेदारी है कि अस्मत के लुटेरों से दुश्मनी मोल लें या जगह जगह जाकर ख़ुद रखवाली करते फिरें एक- एक चीज की ? नेता लोग तो देश सेवा का मेवा पाने के लिए होते हैं, जानदेवा का तो नामलेवा भी यहाँ नहीं रहने देने का रिवाज और परम्परा है ना !! तो ऐसे हर देश और साहित्य के नेताओं के श्रीचरणों में भारतीय मिट्टी की गरीब जनता की गुहार है कि माईबाप! कौउनों तो घर लूटे लिए जाता है सरकार! कुछ तो सुरक्षा की गारंटी दीजिए, आप तो देश सेवा का व्रत लिए थे| शपथ भी खाई थी भरी संसद में... और आपकी सेवा-सेवा और भला-भला जैसी शब्दावली पर रीझ कर ही हम गरीब जनता ने आपकी अपने आपको सच्चा सेवक प्रमाणित करने और कहने की बात पर विश्वास किया था हुज़ूर! आपके रहमो करम पर चलने वाला यह देश ( लक्षणा में -साहित्य) कभी भी लोग बाग अपनी झोली में भर चुरा ले जाने लगे हैं| ज़रा नज़रे इनायत कीजिए, आपकी हिन्दी के भले और हिन्दी की सेवा ( ओह, देश के भले और देश की सेवा) वाले व्यक्तित्व में छेद हुए जाते हैं ----


दायर की जाती पटीशन -

आज एक संदेश मुझे मेरे मेल बॉक्स में मिला


main apne swabhav ke viruddh aaj blogvani kee pravishtiyan dekh raha tha. ek sheershak dekhkar kunwar bechain kee gazal padhne oopar diye link par gaya . kinheen aur sajjan ka blog hai vah.par dee gaee gazal dr. kunwar bechain kee hai----meri anek baar kee padhee,sunee aur uddhrit kee gai.mujhe kaheen unka naam naheen dikha.


मैंने तुंरत खोज ख़बर ली व जो हाल हमारे पहरुओं, सुरक्षाप्रबंधों, हिन्दी - सेवकों और हिन्दी की भलाई के नामलेवाओं का देखा उसे आप भी देखिए| कुँवर बेचैन की इतनी प्रसिद्ध इस ग़ज़ल की सरे आम चोरी का यह नज़ारा हमारी पीठ थपथपाने को बहुत है कि नहीं? लोगबाग वाह वाह करते नहीं अघाते! ये हैं हमारी साहित्य-संस्कृति व समाज के भावी व वर्तमान पहरुए !!


आप लम्बी तान कर सोईये, कहीं आपकी नींद (कुछ घंटे की ज़रा-सी नींद के बाद) उचट गई तो आप कितनों को इसका खामियाजा उठाने की सज़ा दे सकते हैं |


मेरा क्या ?? मुझे तो रात आधी में नींद बर्बाद करके लिखने की बीमारी है। अरे अरे, आप क्यों परेशान होते हैं मेरी इस दशा से, असल में मेरी तो ड्यूटी है -- भई, पहरेदार और रखवाली का काम करने वाले तो चौकीदार सदा से कहे जाते हैं| मैंने तो आज तक अपनी पूरी आचार्य परम्परा से यही सीखा है --

" या निशा सर्वभूतानाम् तस्यां जागर्ति संयमी"

और फिर हम अपनी खामियों को ग़लत सिद्ध करते नहीं थकते और इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं| हैं न हम वाकई महान ???

उक्त चौर्यकर्म के लिंक को क्लिक करके शायद कई लोग वहाँ तक अब मेरी तरह न पहुँच पाएँ , मैंने उसी आईडी को ब्लागस्पाट में खोजा तो जो पन्ना खुला उसका लिंक है यह





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Wednesday, December 10, 2008

वर्तमान की वह पगडंडी जो इस देहरी तक आती थी.....

युद्ध : बच्चे और माँ (कविता)

साहित्य अकादमी के वार्षिक राष्ट्रीय बहुभाषीकवि सम्मेलन की चर्चा मैंने अभी पिछली बार की थी। वहाँ काव्यपाठ में प्रस्तुत अपनी रचनाओं में से एक अभी बाँट रही हूँ।

२५ नव. की रात्रि में इसका पाठ करने से पूर्व मैंने अन्यभाषी श्रोताओं के लिए इसका सार अंग्रेजी में उपलब्ध कराते हुए कहा था कि बच्चे का आतंकवादी में रूपांतरण, आतंक और सृष्टि की निर्मात्री माँ के बीच दो विपरीत ध्रुवों को स्पष्ट करने के साथ साथ यह कविता रेखांकित करती है कि आतंक और युद्ध की स्थितियों की सर्वाधिक पीड़ा स्त्री भोगती है क्योंकि यह संसार उसका रचा हुआ है। तब क्या पता था कि अगले ही दिन २६ नव. को एक बड़ा हादसा भारत की धरती भी घटने की तैयारी कर चुका था। उन अर्थों में इस कविता को उन्नीकृष्णन की माता ( जिसे मैं भारत की वीर माता विद्यावती की प्रतीक मानती हूँ) के चरणों में समर्पित कर रही हूँ व प्रत्येक उस माँ के भी जिनके जाये आतंक या युद्ध का शिकार बने ।




युद्ध : बच्चे और माँ
- कविता वाचक्नवी





निर्मल जल के
बर्फ हुए आतंकी मुख पर
कुँठाओं की भूरी भूसी
लिपटा कर जो
गर्म रक्त मटिया देते हैं
वे,
मेरे आने वाले कल के
कलरव पर
घात लगाए बैठे हैं सब।



वर्तमान की वह पगडंडी
जो इस देहरी तक आती थी
धुर लाशों से अटी पड़ी है,
ओसारे में
मृत देहों पर घात लगाए
हिंसक कुत्तों की भी
भारी
भीड़ लगी है।



मैं पृथ्वी का
आने वाला कल सम्हालती
डटी हुई हूँ
नहीं गिरूँगी....
नहीं गिरूँगी....


पर इस अँधियारे में
ठोकर से बचने की भागदौड़ में
चौबारे पर जाकर
बच्चों को लाना है,
इन थोथे औ’ तुच्छ अहंकारी सर्पों के
फन की विषबाधा का भी
भय
तैर रहा है......।




कोई रोटी के कुछ टुकड़े
छितरा समझे
श्वासों को उसने
प्राणों का दान दिया है
और वहीं दूजा बैठा है
घात लगाए
महिलाओं, बच्चों की देहों को बटोरने

बेच सकेगा शायद जिन्हें
किसी सरहद पर
और खरीदेगा
बदले में
हत्याओं की खुली छूट, वह।



एक ओर विधवाएँ
कौरवदल की होंगी
एक ओर द्रौपदी
पुत्रहीना
सुलोचना
मंदोदरी रहेंगी..........।



किंतु आज तो
कृष्ण नहीं हैं
नहीं वाल्मीकि तापस हैं,
मैं वसुंधरा के भविष्य को
गर्भ लिए
बस, काँप रही हूँ
यहीं छिपी हूँ
विस्फोटों की भीषण थर्राहट से विचलित
भीत, जर्जरित देह उठाए।




त्रासद, व्याकुल बालपने की
उत्कंठा औ' नेह-लालसा
कुंठा बनकर
हिटलर या लादेन जनेगी
और रचेगी
ऐसी कोई खोह
कि जिसमें
हथियारों के युद्धक साथी को
लेकर
छिप
जाने कितना रक्त पिएगी।



असुरक्षित बचपन
मत दो
मेरे बच्चों को,
इन्हें फूल भाते हैं
लेने दो
खिलने दो,
रहने दो मिट्टी को उज्ज्वल
पाने दो सुगंध प्राणों को।



जाओ कृष्ण कहीं से लाओ
यहाँ उत्तरा तड़प रही है !!
वाल्मीकि !
सीता के गर्भ
भविष्य
पल रहा ।
अपनी पुस्तक "मैं चल तो दूँ" (२००५) से


Thursday, December 4, 2008

साहित्य अकादमी का ......

साहित्य अकादमी का ........

साहित्य अकादमी का त्रिदिवसीय साहित्य-समारोह व बहुभाषी कविसम्मेलन भव्यता से सम्पन्न


















साहित्य अकादमी के तत्वावधान में गत 25,26,व 27 नवम्बर को आन्ध्रप्रदेश के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक नगर विजयवाड़ा में त्रिदिवसीय साहित्य समारोह सम्पन्न हुआ, जिसमें स्थानीय संयोजक के रूप में सिद्धार्थ कलापीठम ने सहयोग किया।

25 को प्रात: सम्पन्न उद्घाटन सत्र में पी.एल.एन. प्रसाद ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि यह समारोह मुख्यत: भारतीय भाषाओं की कविताओं पर केन्द्रित है और इसका उद्देश्य भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता को प्रतिपादित करना है। मुख्य अतिथि डॊ. टी कुटुम्बराव ने तेलुगु तथा भारतीय भाषाओं की साहित्यिक धरोहर को अमूल्य बताते हुए रचनाकारों का आह्वान किया कि वे विदेशों से आयातित विचारधाराओं के बजाय अपनी रचनाओं द्वारा मानवजाति की मूलभूत संवेदनशीलता को खंगालें।







इस अवसर पर अकादमी के बहुभाषी प्रकाशनों की पुस्तक-प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया। देश के विविध अंचलों से पधारे रचनाकारों,साहित्यप्रेमियों,बुद्धिजीवियों और छात्रों का पुस्तक-प्रदर्शनी के प्रति उत्साह देखते ही बनता था।


साहित्य समारोह का मुख्य आकर्षण बहुभाषी कविसम्मेलन रहा। आमन्त्रित विशिष्ट कवियों का स्वागत करते हुए साहित्य अकादमी (साऊथ ज़ोन) के सचिव ए.एस. इलांगोवा ने कहा कि यह समारोह साहित्य के माध्यम से विभिन्न भाषा-भाषियों के बीच समन्वय स्थापित करने और उनमें विद्यमान एकता के पहचान करने की दृष्टि से आयोजित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सारी भाषाएँ एक ही अक्षयवट की अनेकानेक शाखाओं के समान हैं और मिलकर भारतीयता को पुष्ट करती हैं।



कविसम्मेलन की अध्यक्षता डॊ. एन. गुरुप्रसाद राव ने की तथा संचालन डॊ.तंगिराला वेंकटसुब्बाराव ने किया। कवियों ने अपनी कविताएँ अपनी मातृभाषा के साथ-साथ हिन्दी और अंग्रेज़ी अनुवाद के साथ प्रस्तुत कीं। अलग-अलग भाषाओं की कविताओं में मुख्यरूप से पृथ्वी के अस्तित्व की चिन्ता, भारतीय मिथकों की समकालीन व्याख्या, स्त्रीजीवन की यातना, स्त्रीकी बदलती छवि, युद्ध और आतंकवाद के प्रति चिन्ता, मानवाधिकार चेतना तथा मनुष्य और मनुष्य के छीजते जा रहे सम्बन्ध और सम्वेदनाओं के प्रसंग मुखरित हुए।
असमिया भाषा के अर्चना पुजारी और उदयकुमार शर्मा ने प्रकृति और लोक पर केन्द्रित कविताएँ प्रस्तुत कीं तो तेलुगु रचनाकार रोहिणी सत्या और जे. प्रेमचा की कविताओं में उत्तरआधुनिक विमर्श के स्वर सुनाई दिए, जबकि तमिलभाषी वैगई सेल्वी ने आधुनिक स्त्री तथा कन्नड़भाषी संध्या रेड्डी और आनंद जुंजुरवाड़ ने भूमंडलीकृत समाज की चिन्ताओं को अपनी कविता का विषय बनाया। मलयालम रचनाकार रफ़ीक अहमद और ई.आर.टोनी ने अपनी कविताओं में समाज के वंचित वर्ग की पीड़ा का वर्णन किया, जबकि उर्दु कवयित्री जमीला निशात ने मुस्लिम औरत की यातना और बगावत को विषय बनाया। प्रो. जी मोहन रमणने छोटी-छोटी अंग्रेज़ी कविताओं के रूप में रिश्ते -नातों की मधुरता और मानव जीवन में स्मृति की भूमिका पर प्रभावशाली कविताएँ पढ़ीं। हिन्दी कवयित्री डॊ. कविता वाचक्नवी ने जहाँ सहज जीवन के उल्लास को अपनी गज़ल "बारिश का पहला छींटा" के माध्यम से व्यक्त किया वहीं आतंकवाद से त्रस्त मनुष्यता और विशेषत: स्त्री की पीड़ा को " युद्ध : बच्चे और माँ " कविता द्वारा अभिव्यक्ति प्रदान की।



तेलुगु के प्रसिद्ध साहित्यकार देवरकोंडा बालगंगाधर तिलक के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित एक सत्र में डॊ. वेंकट सुब्बाराव ने उनके संस्मरण सुनाए, जिनका तेलुगुभाषी श्रोतासमूह ने भरपूर आनंद लिया। तीसरे दिन लोककलाओं की प्रस्तुति के अन्तर्गत महाभारत और गोल्लकथा की रँगारंग कलात्मक प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
























`
The Hindu'
और `Deccan Chronicle' ने मेरे ही चित्र छापे,जबकि समाचार तो - समाचार पत्रों में छपा| कुछ की कतरनें ले आई थी वे ऊपर संजो ली हैं| बल्कि डेक्कन क्रॊनिकल में बिना समाचार के केवल चित्र छपा था, जिसे अगले दिन सायंकालीन सत्र से पूर्व बाहर चायपान के समय एक वृद्ध - से सज्जन ने आकर बताया और घिसट कर चलते जा कर वे अँधेरा होने के बावजूद भी कहीं से पेपर ले कर आए और सभागृह मे मुझे सौंपा। मैं एकदम भावविगलित कंठ से उन्हें अच्छे -से धन्यवाद भी नहीं कह पाई (कार्यक्रम आरम्भ हो चुका था एकदम प्रथम पंक्ति मे होने के कारण बातचीत खड़े होकर मेरे लिए संभव थी) The Hindu तो होटल के मेरे कमरे मे स्वत: ही डाल दिया गया था| फिर सायं कालीन सत्र के लिए नीचे आई तो रिसेप्शन वालों ने अपने यहाँ आने वाले पत्रों मे समाचार दिखा कर वे मुझे सौंप दिए| अच्छा लगा वरना उस प्रकार के बढ़िया स्तर के होटल वाले ऐसी सद्भावना कम ही दिखाते हैं। यात्रा सुखदा संस्मरणात्मक रही. देश के अलग अलग भागों से आए लोगों से मिलने का आह्लाद भी बना रहा।









पाकिस्तान ने अपनी सूची में बाल ठाकरे माँगे

पाकिस्तान ने अपनी सूची में बाल ठाकरे माँगे

पाकिस्तान ने अपनी सूची में बाल ठाकरे माँगे

bal_thackeray_copy.jpgभारत सरकार द्वारा पाकिस्तान को सौंपी गई आतंकवादियों की सूची के बदले में पाकिस्तान सरकार ने भी भारत में रहने वाले उन आतंकवादियों की एक सूची तैयार की है, जिन्होंने पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया। इस सूची में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे, अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन और बबलू श्रीवास्तव जैसे नाम भी शामिल हैं। पाकिस्तान के एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार डैली मेल ने पाकिस्तानी सरकार के खुफिया सूत्रों के हवाले से यह खबर प्रकाशित करते हुए उन सभी लोगों की सूची दी है, जो पाकिस्तान सरकार की निगाह में आतंकवादी हैं।

सूची में बाल ठाकरे का नाम चौथे नंबर पर है। ठाकरे पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान में तीन जगह बम धमाके करवाए जिसमें जिनमें 33 पाकिस्तानियों की जानें गई। बाल ठाकरे को पाकिस्तान में जातीय हिंसा भड़काने का जिम्मेदार भी बताया गया है। डैली मेल के अनुसार पाकिस्तान सरकार द्वारा तैयार सूची में 35 लोगों के नाम हैं, जो बारत में हैं और पाकिस्तान सरकार उनकी तलाश कर रह है।

यह सूची इस प्रकार है। अजय वर्मा (कर्नाटक), मनोज शास्त्री उर्फ जावेद खान (मुंबई ) राजू मुखर्जी ( कोलकाता निवासी) बाल ठाकरे , मुंबई) विवेक खत्री उर्फ काला पठान (महाराष्ट्र निवासी), अशोक विद्यार्थी उर्फ असलम (अजमेरशरीफ) राजन निखालजे उर्फ छोटा राजन (अखबार के अनुसार राजन भारत सरकार की एजंसी रॉ के लिए काम करता है) के आशुतोष श्रीवास्तव उर्फ मौलवी नजीर उर्फ मुल्ला ( इलाहाबाद), अशोक दुबे उर्फ शाहजी (गांधीनगर), संजीव जोशी (मुंबई) रामप्रकाश उर्फ रानू उर्फ अली ( हैदराबाद), रमेश वर्मा (पुणे), बिहारी मिश्र और मनोज कुलकर्णी (कोलकाता), वेंकटेश राघवन , (महाबलेश्वर) अजित सहाय , अशोक वोहरा उर्फ नेपाली , विजय कपाली उर्फ गुरु ( महाराष्ट्र ) विवेक संतोषी (कोलकाता), मोहनदास शर्मा ( पटना) रामगोपाल सूरती ( सूरत), राकेश उर्फ कालिया ( मुंबई) प्रकाश संतोषी , लखनऊ निवासी 24) अमन वर्मा उर्फ पप्पू उर्फ गुल्लू (आगरा), मोहिंदर प्रकाश उर्फ यासिन खान उर्फ रियाज चिट्ठा , (लखनऊ), आशीष जेटली उर्फ शेख उर्फ ओसामा (मुंबई), मनोहर लाल उर्फ पीरजी उर्फ अबू खालिद (गोहाटी) रामनारायण उर्फ मुफ्ती (नई दिल्ली) अरुण शेट्टी , मुंबई निवासी 30) निखंज लाल , (हरियाणा) सुनील वर्मा उर्फ हत्यारा (महाराष्ट्र), आशीष चौहान नई दिल्ली) बबलू श्रीवास्तव (छोटा राजन गैंग का सदस्य), सुरेश उर्फ आमिर उर्फ अकबर खान अबू बकर (नई दिल्ली)।

लगता है पाकिस्तान सरकार ने यह सूची पाकिस्तान में बैठे दाउदज इब्राहिम के कहने पर तैयार करवाई है।


मीडिया डेस्क | गुरुवार , 04 दिसम्बर 2008
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