एक पुराना संस्मरणात्मक लेख
Thursday, December 29, 2011 Labels: Kavita Vachaknavee, Literature, कविता वाचक्नवी, संस्मरण, साहित्य 1 comments
एक पुराना संस्मरणात्मक लेख
(यह लेख 16 अगस्त 2010 को यहाँ लिखा था )
(यह लेख 16 अगस्त 2010 को यहाँ लिखा था )
कवि गोपालदास नीरज जी का अभिनन्दन व काव्यपाठ : वीडियो
स्वाधीनता दिवस के अवसर पर
- (डॉ.) कविता वाचक्नवी
- (डॉ.) कविता वाचक्नवी
गत वर्ष २००९ के १५ अगस्त (स्वाधीनतादिवस) के अवसर पर हैदराबाद में कवि गोपालदास नीरज जी के अभिनन्दन व काव्यपाठ का एक आयोजन रखा गया था. आयोजकों द्वारा मुझे भी आमंत्रण व सूचना मिली. उन दिनों हैदराबाद में ही थी व यूके के लिए प्रस्थान करने ही वाली थी. तिथियाँ तो ठीक से स्मरण नहीं किन्तु एकदम यात्रा सिर पर थी और अत्यंत भागदौड़ व मेलमिलाप की औपचारिकताओं का दबाव भी था. पुनरपि नीरज जी के काव्यपाठ का जादू अपने मोहपाश में काव्यप्रेमियों को खींचता ही है, इसलिए यह संभव ही नहीं था कि इस सुअवसर से वंचित रहा जाए. कार्यक्रम कई घंटे का व दो किश्तों में था. बीच में जलपान (जो लगभग रात्रिभोजन सरीखा ही था) सहित नीरज जी को मित्रों के साथ मिलकर सुनना एक बहुत ही स्मरणीय व आनंददायक संस्मरण के रूप में परिणित हुआ .
नीरज जी व्हीलचेयर पर थे पुनरपि अपनी उसी जिजीविषा व मस्ती में उन्होंने घंटो काव्यपाठ किया. साथ ही जीवन के इस दौर में बुढापे की अवस्था में लिखी कई कविताएँ भी सुनाईं, जिनमें जीवनदर्शन और जीवनानुभव का ताप सहज ही अनुभव किया जा सकता था. साहित्यिक अभिरुचि वाले श्रोताओं की इच्छा व माँग पर कई पुरानी रचनाओं का पाठ भी उन्होंने किया. फ़िल्मी लेखन के उनके जादू से प्रभावितों ने उनकी फिल्मों में प्रयोग हुई कई रचानाओं को मनोयोग पूर्वक आग्रह करके सुना. आश्चर्य की बात कि अपनी इस अवस्था में भी नीरज जी उतने ही सजग हैं व स्मरणशक्ति भी सचेत है कि लगभग ४-५ घंटों का कवि सम्मलेन व आयोजन वे सहज ही अपने दम पर निभा गए. सच में वह एक अविस्मरणीय साँझ थी. मंचीय कविसम्मेलनों में साहित्यिक रचनाधर्मिता का युग जैसे नीरज जी पर आकार थम जाता है. आज की मंचीय कविता की जो गति-मति है, उसे तो कविता की श्रेणी में परिगणित करना भी अपराध है.
दुर्भाग्य यह रहा कि मैं उनके काव्यपाठ के वीडियो नहीं ले पाई. कार्यक्रम के पश्चात् संयोजकों-आयोजकों को संपर्क कर आग्रह किया कि वे नीरज जी के वीडियो उपलब्ध करवा दें, कोई सीडी हो तो उसकी कॉपी ले ली जाए (उन्होंने सम्पूर्ण कार्यक्रम की विधिवत् रेकार्डिंग करवाई थी) ; किन्तु उनका रुख इस आयोजन के पीछे विशुद्ध व्यापारिक ही उजागर हुआ कि वे इसकी सीडी बनवा कर बाजार में उतारेंगे व तब मार्केट से खरीदी जाएँ. वह कब संभव होगा का भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला; उलटे, दाता व याचक जैसी भंगिमा व स्वर ही सुनने देखने को मिले.
देश विदेश के कई मित्रों ने उलाहना भी दिया कि `आज के सर्वसुविधासम्पन्न समय में ऐसे अवसर के वीडियो तक आप नहीं जुटा पाईं, यह तो हद है'.
गत दिनों उस कार्यक्रम के कुछ वीडियो मुझे दिखाई दे गए. अप्रैल से एक एक कर उन्हें सहेजते हुए रख रही थी. किन्तु सबको एकत्र कर प्रस्तुत कर पाना संभव ही नहीं हो पा रहा था. अब क्योंकि कल उस अवसर को एक वर्ष पूरा हुआ है, स्वाधीनता दिवस के उस काव्यपाठ की पहली वार्षिकी है ( व आगामी कुछ माह नेट को यदा कदा ही छूना हो पाएगा), इसलिए आज सभी के अवलोकनार्थ नीरज जी के उस काव्यपाठ के टुकड़ा टुकड़ा अंश समेकित रूप में यहाँ प्रस्तुत हैं -
गत दिनों उस कार्यक्रम के कुछ वीडियो मुझे दिखाई दे गए. अप्रैल से एक एक कर उन्हें सहेजते हुए रख रही थी. किन्तु सबको एकत्र कर प्रस्तुत कर पाना संभव ही नहीं हो पा रहा था. अब क्योंकि कल उस अवसर को एक वर्ष पूरा हुआ है, स्वाधीनता दिवस के उस काव्यपाठ की पहली वार्षिकी है ( व आगामी कुछ माह नेट को यदा कदा ही छूना हो पाएगा), इसलिए आज सभी के अवलोकनार्थ नीरज जी के उस काव्यपाठ के टुकड़ा टुकड़ा अंश समेकित रूप में यहाँ प्रस्तुत हैं -




सुन्दर संकलन, नीरजजी को सुनना बड़ा अच्छा लगता है।